बिहार में 3035 फर्जी सरकारी शिक्षकों की हुई पहचान, अब ब्याज समेत लौटाना होगा वेतन?

बिहार में बड़े पैमाने पर फर्जी सरकारी शिक्षकों का खुलासा हुआ है. निगरानी ब्यूरो की जांच रिपोर्ट में करीब 3035 सरकारी शिक्षकों की पहचान की गयी है जो फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे थे. इस पूरे मामले में अब तक 1830 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. इस मामले में शुक्रवार (जुलाई 10, 2026) को बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा (बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी) एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए बहुत कुछ बताया.

इन शिक्षकों की भर्ती 2006 से 2015 के बीच की गई थी.

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इन शिक्षकों को बर्खास्त किया जायेगा. सरकार इन फर्जी शिक्षकों से अब तक लिया गया वेतन ब्याज समेत वसूलेगी. बताया गया कि यह पूरा फर्जीवाड़ा 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक बहाली प्रक्रिया से जुड़ा है.

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अभ्यर्थियों द्वारा जमा किये गये प्रमाण पत्र एवं अंकतालिकाएं पूर्णतया फर्जी अथवा जाली थीं। नौकरी पाने के लिए इस्तेमाल की गईं कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी डिग्रियां पूरी तरह से फर्जी पाई गई हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसी कार्रवाई होगी कि फर्जीवाड़ा करने वालों की रूह कांप जायेगी.

अब बहाली से पहले दस्तावेजों की जांच होगी

आगे मिथिलेश तिवारी ने कहा कि अब हर बहाली से पहले डिग्री और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी. क्लीयरेंस मिलने के बाद बहाली होगी. बहाली के बाद जांच व्यवस्था समाप्त हो जायेगी. उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी डिग्री पर बहाल शिक्षकों की संख्या और बढ़ सकती है. आगे भी बड़े पैमाने पर जांच की जाएगी. सम्राट सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है. निगरानी ब्यूरो से रिपोर्ट मेरे पास आ रही है.

किसने क्या कहा?

दीपांकर गौरव, अध्यक्ष, बिहार युवा शिक्षक संघ: “नीतीश के शासनकाल में फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की बहाली कैसे हो गई, यह बड़ा सवाल है। शिक्षा विभाग की बहाली प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। ऐसे फर्जी शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। अभिभावकों को धोखा दिया जा रहा है। तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

सौरव कुमार, अध्यक्ष, बिहार छात्र संघ: फर्जी डिग्री पर बहाल शिक्षकों पर अविलंब कार्रवाई हो. जांच कराने के लिए सम्राट सरकार को धन्यवाद. टीआरई-1 से लेकर टीआरई-3 तक फर्जी डिग्री के आधार पर भी बड़े पैमाने पर बहाली हुई है. इसकी भी जांच होनी चाहिए.”

एजाज अहमद, प्रवक्ता, राजद: शिक्षक नियुक्ति में यह फर्जीवाड़ा तब हुआ था जब नीतीश सीएम थे. नीतीश के सुशासन की पोल खुल गयी है. बिहार की मौजूदा सरकार जांच कराकर अपने ही सहयोगी दल जेडीयू को कटघरे में खड़ा कर रही है. वर्षों से ऐसे शिक्षकों ने बच्चों को पाला है जिनकी बहाली फर्जी डिग्री के आधार पर हुई, जिससे बच्चों का भविष्य बर्बाद हो गया.”

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