Kailash Parvat ka Rahasya Vigyan vs Myth: तिब्बत के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत दुनिया के सबसे रहस्यमय और पवित्र स्थलों में गिना जाता है। लगभग 6,638 मीटर ऊँचा यह पर्वत, ऊँचाई में भले ही माउंट एवरेस्ट से छोटा हो, लेकिन रहस्य, आस्था और सम्मान के मामले में एवरेस्ट से कहीं आगे खड़ा दिखाई देता है।
जहाँ एवरेस्ट पर अब तक हजारों पर्वतारोही चढ़ चुके हैं, वहीं कैलाश पर्वत ऐसा शिखर है जिस पर आज तक किसी भी इंसान के चढ़ने का प्रमाण मौजूद नहीं है। यही वजह है कि इसे लेकर विज्ञान, धर्म और मिथकों की एक अनोखी दुनिया बन चुकी है।
Kailash Parvat ka Rahasya Vigyan vs Myth
कैलाश पर्वत से जुड़े रहस्यमयी दावे और ‘टाइम मशीन’ की थ्योरी
कैलाश पर्वत को लेकर सबसे चर्चित दावे 1999 में रूसी डॉक्टर अर्न्स्ट मूलदाशेव और उनकी टीम ने किए थे। उनके अनुसार, कैलाश पर्वत अंदर से खोखला है और इसके भीतर प्राचीन सभ्यताओं के लोग समाधि अवस्था में मौजूद हैं।
कुछ दावों में तो इसे एक तरह की ‘टाइम मशीन’ बताया गया, जहाँ समय की गति दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग होती है। लोककथाओं के अनुसार, कैलाश के आसपास जाने पर लोगों के बाल और नाखून असामान्य रूप से तेज़ी से बढ़ने लगते हैं।
यहाँ तक कहा जाता है कि कुछ पर्वतारोहियों ने चढ़ने की कोशिश के बाद कम समय में ही तेज़ी से बूढ़ा होने जैसा अनुभव किया।
हालाँकि सच यह है कि इन दावों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है और न ही किसी आधिकारिक पर्वतारोहण संस्था ने ऐसी घटनाओं की पुष्टि की है।
चार धर्मों का पवित्र केंद्र है कैलाश पर्वत
कैलाश पर्वत सिर्फ एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि चार प्रमुख धर्मों का आस्था केंद्र है:
- हिंदू धर्म: भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान
- बौद्ध धर्म: चक्रसंवर और वज्रारी साधना का केंद्र
- जैन धर्म: ‘अष्टापद’ पर्वत, जहाँ ऋषभदेव को मोक्ष मिला
- बोन धर्म: धरती और स्वर्ग के मिलन का स्थल
यही वजह है कि कैलाश पर्वत को केवल पहाड़ नहीं, बल्कि एक जीवंत धार्मिक प्रतीक माना जाता है।
मानसरोवर और राक्षस ताल: विज्ञान भी करता है सम्मान
कैलाश के पास स्थित दो झीलें भी अपने आप में रहस्य हैं:
- मानसरोवर झील – मीठा पानी, जीवन से भरपूर
- राक्षस ताल – खारा पानी, लगभग निर्जीव
वैज्ञानिक दृष्टि से राक्षस ताल एक एंडोरहेक झील है, जहाँ पानी बाहर नहीं निकलता और वाष्पीकरण के कारण खनिजों की मात्रा अधिक हो जाती है। यानी यहाँ विज्ञान भी है और रहस्य भी।
क्या अदृश्य शक्तियाँ रोकती हैं लोगों को कैलाश चढ़ने से?
इतिहास में कई पर्वतारोहियों ने प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
1926 में ह्यूज रटल्स ने इसे अत्यधिक खतरनाक ढलान वाला क्षेत्र बताया।
1985 में महान पर्वतारोही राइनहोल्ड मेसनर को चीनी सरकार ने चढ़ने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने यह कहकर इनकार कर दिया कि
“देवताओं के निवास को जूतों तले कुचलना इंसानियत नहीं है।”
2001 में अंतरराष्ट्रीय विरोध के बाद चीन सरकार ने कैलाश पर्वत पर पर्वतारोहण पर स्थायी प्रतिबंध लगा दिया।
यानी असली वजह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि धार्मिक सम्मान + कानूनी प्रतिबंध है।
विज्ञान क्या कहता है इन रहस्यों पर?
वैज्ञानिक नजरिए से:
- कैलाश की पिरामिड जैसी आकृति → प्राकृतिक ग्लेशियर कटाव का परिणाम
- टाइम मशीन थ्योरी → कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं
- नासा और ऊर्जा क्षेत्र → कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं
- मूलदाशेव के दावे → वैज्ञानिक शोध पत्रों में मान्यता नहीं
मतलब साफ है — इंटरनेट की कहानियाँ वायरल हैं, लेकिन प्रमाण ज़ीरो।
निष्कर्ष: कैलाश की ताकत रहस्य में नहीं, सम्मान में है
कैलाश पर्वत का असली चमत्कार उसकी ऊँचाई, रहस्य या मिथकों में नहीं, बल्कि उस सम्मान में है जो पूरी दुनिया इसे देती है।
आज के दौर में जब इंसान चाँद, मंगल और अंतरिक्ष तक पहुँच चुका है, तब भी एक पर्वत ऐसा है जिस पर जानबूझकर नहीं चढ़ा जाता — क्योंकि वहाँ आस्था है, श्रद्धा है और परंपरा है।
सीधी बात —
कुछ चीज़ें जीतने के लिए नहीं होतीं,
कुछ चीज़ें मानने के लिए होती हैं।
और कैलाश पर्वत… उन्हीं में से एक है। 🙏
















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