बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट (बांकीपुर विधान सभा सीट) लेकिन उपचुनाव होने हैं. जन सुराज पार्टी (जन सुराज पार्टी) प्रशांत किशोर से (प्रशांत किशोर) उम्मीदवार होंगे. इसकी घोषणा रविवार (जुलाई 05, 2026) को की गई। प्रशांत किशोर ने चुनाव मैदान में उतरकर बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. इस सीट से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (नितिन नबीन) विधायक थे. प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हो गया है.
प्रशांत किशोर की बात करें तो उन्होंने कई पार्टियों के लिए काम किया है. कई पार्टियों को चुनाव प्रचार में सफलता भी मिली है. प्रशांत किशोर भी अक्सर इस पर चर्चा करते रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या दूसरों को राजनीतिक हीरो बनाने वाले प्रशांत किशोर खुद राजनीतिक सुपरस्टार बन पाएंगे?
अगर विपक्ष साथ दे तो प्रशांत किशोर जीत सकते हैं
वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्र कुमार से पूछा गया कि प्रशांत किशोर ने कई लोगों को सुपरस्टार बनाया है, उन्होंने जिसकी भी पीआर की उसे जीत मिली, क्या इस बार वह खुद को सुपरस्टार बना पाएंगे? इस पर उन्होंने कहा, ‘यह एक बड़ा सवाल है… उन्होंने अपना दावा पेश कर विपक्ष के रथ को फंसा दिया है कि अगर बीजेपी को रोकना है तो विपक्ष को प्रशांत किशोर के पीछे जुटना होगा… अगर विपक्ष नहीं जुटता है तो इस बार प्रशांत किशोर चिल्लाकर कहेंगे कि वे (विपक्ष) बीजेपी के रथ को रोकने के लिए चुनाव नहीं लड़ते हैं बल्कि बीजेपी को एक सुरक्षित संदेश देने के लिए चुनाव लड़ते हैं कि वोटों का बंटवारा होना चाहिए और बीजेपी को चुनाव जीतना चाहिए.’ यानी साफ है कि अगर विपक्ष साथ देता है तो प्रशांत किशोर के जीतने की संभावना ज्यादा है.
प्रशांत किशोर के लिए अच्छी बातें क्या हैं?
बांकीपुर सीट बीजेपी के पास रही है. विपक्ष के लिए यहां से जीतना हमेशा मुश्किल रहा है. ऐसे में सवाल यह है कि प्रशांत किशोर के लिए सकारात्मक बातें क्या हैं? इस पर उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पढ़े-लिखे हैं, ऊंची जाति के हैं, बांकीपुर शहरी इलाका है, ऊंची जाति के प्रभुत्व वाला इलाका है, पढ़े-लिखे लोग प्रशांत किशोर की ओर आकर्षित हो सकते हैं. क्योंकि प्रशांत किशोर ऊंची जाति से आते हैं इसलिए प्रशांत किशोर बीजेपी के जाति आधारित वोट बैंक में भी सेंध लगा सकते हैं. यह सीट कायस्थ बहुल है, लेकिन ऊंची जातियों में सिर्फ कायस्थ ही नहीं, अन्य जातियां भी हैं, जिनका वोट प्रशांत किशोर आकर्षित कर सकते हैं.
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धीरेंद्र कुमार ने कहा कि भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब भी गर्म है. इसका फायदा प्रशांत किशोर को भी हो सकता है.
‘अपनी राजनीतिक छवि बनाने में विफल’
चर्चा है कि पीके बहुत नुकसान करेगा, क्या प्रशांत किशोर के लिए कुछ नकारात्मक बातें हो सकती हैं? इस पर उन्होंने कहा, “प्रशांत किशोर अभी भी अपनी राजनीतिक छवि बनाने में नाकाम रहे हैं. कभी वो कांग्रेस को जिताने का ठेका लेते हैं तो कभी डीएमके को जिताने का काम करते हैं, जिस वक्त प्रशांत किशोर को मैदान में होना चाहिए था वो नहीं थे. ये कहना मुश्किल है कि प्रशांत किशोर मैदान में टिक पाएंगे या नहीं.”
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