बांकीपुर उपचुनाव (बांकीपुर उपचुनाव) नतीजों से पहले ही ऐसा लग रहा था कि राजद ने हार मान ली है. राजद ने रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है और वह भी क्षेत्र में घूम रही हैं. इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने दावा किया है कि बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत होगी. (प्रशांत किशोर) पलड़ा भारी लग रहा है. उनके इस दावे से राजनीतिक हंगामा मच गया है.
पिछले मंगलवार (जुलाई 4, 2026) को शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए ये दावा किया. शिवानंद तिवारी का कहना है कि बांकीपुर सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही है. ऐसी भी धारणा रही है कि यहां कायस्थ मतदाताओं का प्रभाव सबसे ज्यादा है और लंबे समय से इस सामाजिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे हैं, लेकिन इस बार हालात अलग नजर आ रहे हैं. इस चुनाव में प्रशांत किशोर का पलड़ा भारी नजर आ रहा है.
शिवानंद तिवारी ने इसकी वजह बताई
प्रशांत किशोर क्यों हैं ताकतवर इसका जिक्र शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में भी किया है. इसके पीछे उन्होंने सबसे पहली वजह महागठबंधन की स्थिति बतायी है. उनका कहना है कि राजद ने फिर से उसी महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है जो पिछला चुनाव हार गई थी. आपको बता दें कि रेखा गुप्ता 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद से चुनाव भी लड़ी थीं.
तेजस्वी यादव ने बोला हमला
शिवानंद तिवारी ने कहा कि इससे भी बड़ी बात यह है कि चुनाव के सबसे महत्वपूर्ण समय में महागठबंधन के प्रमुख नेता विदेश चले गये हैं. यहां उनका मतलब तेजस्वी यादव से था. राजद नेता ने कहा कि जब किसी भी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपने उम्मीदवार के चुनाव प्रचार को प्राथमिकता नहीं दे रहा है तो कार्यकर्ताओं के मनोबल और मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ना स्वाभाविक है. राजनीति न केवल संगठन का बल्कि मनोविज्ञान का भी खेल है।
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उम्मीदवार चयन पर घिरी बीजेपी
वहीं शिवानंद तिवारी ने भी बीजेपी पर तंज कसा है. उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवार चयन में जो असमंजस और असमंजस दिखाया है, उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं. यह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा खाली की गई प्रतिष्ठित सीट है. पहले घोषित उम्मीदवार को हटाना पड़ा और फिर दूसरे उम्मीदवार को आगे लाना पड़ा, जिसे सुनकर बीजेपी पर आश्चर्य होता है.
उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी ताकत उनकी राजनीतिक रणनीति और चुनाव प्रबंधन का लंबा अनुभव है. उन्होंने कई राज्यों में चुनावी रणनीतिकार के तौर पर सफल अभियान चलाये हैं. इसलिए इस बात पर विश्वास करना मुश्किल है कि बिना गहन अध्ययन और ठोस राजनीतिक गणना के उन्होंने बांकीपुर जैसी सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया होगा. यह निश्चित तौर पर एक बड़ा जोखिम है, क्योंकि अब तक यहां बीजेपी को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते रहे हैं, लेकिन बड़े राजनीतिक बदलाव अक्सर ऐसे जोखिमों से ही शुरू होते हैं. ऐसा लग रहा है कि बीजेपी इस चुनाव को लेकर ज्यादा आश्वस्त है.
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