सोनम वांगचुक पर बिहार के वरिष्ठ नेता की प्रतिक्रिया, ‘इतने दिन बाद भी सरकार…’

देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ती जा रही है. वह पिछले 18 दिनों से आमरण अनशन पर हैं. इस बीच बिहार के एक कद्दावर नेता ने सरकार को घेरा है. राजद नेता शिवानंद तिवारी ने विपक्ष से एकजुट होने की अपील की है.

पिछले मंगलवार (14 जुलाई 2026) को शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस संबंध में सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाए थे. राजद नेता ने कहा कि सोनम वांगचुक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे युवाओं को अकेला न छोड़ें. देश के सभी विपक्षी दलों को लोकतंत्र की इस आवाज के साथ खड़ा होना चाहिए।

‘सोनम वांगचुक असाधारण प्रतिभाशाली हैं’

शिवानंद तिवारी का कहना है कि इतने दिन बाद भी सरकार की ओर से जिस तरह की उदासीनता दिखाई जा रही है, वह चिंताजनक है. धीरे-धीरे अनशनकारियों की हालत भी बिगड़ती जा रही है. सोनम वांगचुक कोई आम इंसान नहीं हैं. उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता कहें, वैज्ञानिक कहें या जननेता कहें, यह तय है कि वे असाधारण प्रतिभा के धनी हैं।

‘उनकी मांगें असंगत या अव्यवहारिक नहीं हैं’

राजद नेता ने सोनम वांगचुक की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने लद्दाख जैसे कठिन इलाके में बर्फ से कृत्रिम ग्लेशियर (बर्फ के स्तूप) बनाकर सिंचाई की एक नई प्रणाली विकसित की और सैनिकों के लिए ऐसे आवासों के निर्माण में योगदान दिया, जहां का तापमान बाहर की तुलना में अधिक अनुकूल है। उनके कार्यों से प्रेरित होकर लोकप्रिय फिल्में भी बनीं। उनकी माँगें असंगत या अव्यवहारिक भी नहीं हैं।

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शिवानंद तिवारी फेसबुक पोस्ट में लिखते हैं, “हिंदुओं को डर दिखाकर और मुसलमानों के प्रति नफरत पैदा करके राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश न तो लोकतांत्रिक समाज के लिए अच्छा संकेत है और न ही देश के लिए. भारत की ताकत उसकी विविधता, सह-अस्तित्व और सामाजिक सद्भाव में रही है.”

उन्होंने आगे कहा, ”मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह सोनम वांगचुक और उनके सहयोगियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और लोकतांत्रिक बातचीत का रास्ता अपनाए.

साथ ही सरकार के विरोध में खड़े सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से भी मेरा अनुरोध है कि वे सोनम वांगचुक को अकेला न छोड़ें.”

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