क्या डूबने दिया जाएगा LIC का पैसा?, Will LIC keep losing its money?, LIC-Adani Controversies

Will LIC keep losing its money

Will LIC keep losing its money: आज कहानी है देश के जवानों की और जीवन बीमा की। देश के जवानों को पेंशन का पैसा नहीं मिलता है, लेकिन अदानी समूह में निवेश करने के लिए सरकारी संस्थानों को पैसे की कमी नहीं होती है। दोनों बातों में संबंध नहीं होते हुए भी दोनों ही बातें बेहद गंभीर हैं। 4 लाख जवान वन रैंक, वन पेंशन के अरियर के इंतजार में दुनिया से ही चले गए, मगर समय पर अरियर का पैसा नहीं आया। 2019 में आ जाना चाहिए था मगर 2023 आ गया.

Will LIC keep losing its money?

पूर्व सैनिकों की संस्था की तरफ से पैरवी करते हुए वकील हुजैफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही है. अगर ऐसा हुआ है तो क्या यह इतनी छोटी खबर है कि इसे अनदेखा कर दिया जाए. देश के लिए जान देने वाले जवानों को वन रैंक, वन पेंशन का पैसा समय पर क्यों नहीं दिया गया. इसकी गिनती समय से पहले या समय पर क्यों नहीं की गई.

Will LIC keep losing its money

अदानी और भारतीय जीवन बीमा निगम की ख़बरों पर आने से पहले इस पर नजर डाल लेते हैं, जब जवानों के साथ ऐसा हो सकता है, तो बाकी देश की जवानी का क्या हाल होगा, आप समझ सकते हैं।

How much has India’s largest insurer suffered in the Adani fiasco?

उत्कर्ष आनंद की एक रिपोर्ट हिंदुस्तान टाइम्स में छपी है, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि 15 मार्च तक सभी रिटायर्ड जवानों और अफसरों को वन रैंक, वन पेंशन के अरियर का भुगतान कर दिया जाना चाहिए, हर 5 साल पर वन रैंक, वन पेंशन की समीक्षा होती है। जनवरी 2019 से लेकर अब तक का पैसा सैनिकों को नहीं मिला है. अदालत इस बात से भी नाराज हो गई कि जब आदेश यह दिया गया कि एक ही बार में सारा पैसा दिया जाए तो रक्षा मंत्रालय के सचिव ने चार किस्तों में पैसे जारी करने का आदेश कैसे दे दिया। कोर्ट ने सचिव से अब जवाब माँगा है. अब जाकर रक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया है कि 15 मार्च तक 2019 के बाद का अरियर एक साथ ही दिया जाएगा।

वन रैंक, one pension की गिनती कैसे हो?

5 साल की जगह हर साल इसके बढ़ाने पर विचार हो, इसे लेकर retired सैनिकों का संगठन सुप्रीम कोर्ट गया. वादा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था। मगर इसे हासिल करने के लिए सैनिकों को 2015 के साल में जंतर-मंतर पर आमरण अनशन भी करना पड़ा। लेकिन revise pension देने के नाम पर सरकार कोर्ट से ही समय मांगती रही कि गिनती के लिए टेबल बनाने हैं, समय लगेगा। सैनिक संगठन उससे भी संतुष्ट और सहमत नहीं है.

कोर्ट में सैनिक संगठन के वकील ने कहा कि इस दौरान 4 लाख सैनिक revise पेंशन मिलने के इंतजार में दुनिया से ही चले गए. तो क्या आपको पता था कि one रैंक, one पेंशन के तहत 2019 में जो पेंशन revise होनी थी. उसका बढ़ा हुआ पैसा यानी 2023 तक नहीं मिला है। क्या आपने किसी हिंदी अखबार में ये मोटी-मोटी हैडलाइन देखी है कि वन रैंक, वन पेंशन के अरियर के इंतजार में 4 लाख सैनिक दुनिया से ही चले
गए।

क्या सरकार को press conference कर इस मामले में और सफाई नहीं देनी चाहिए? एलआईसी कब तक अदानी समूह की कंपनियों में पैसा लगाए रखेगी? इस पर भी कोई मंत्री नहीं बोल रहा है। एलआईसी ने नहीं बताया कि अदानी समूह से क्या बात हुई? किस तरह के सवाल पूछे गए और जवाब क्या मिला? बस खबर आई कि पूछा जाएगा, फिर कुछ खास खबर नहीं आई।

अदानी समूह में निवेश के कारण एलआईसी को 3 हजार करोड़ का घाटा बताया जा रहा है। क्या ये इतना कम है कि निवेश के फैसले की समीक्षा ना हो और पैसा ना निकाला जाए? कोई ऐसा दिन नहीं होता जब बाजार खुलता हो और खुलते ही अडाणी समूह के कई शेयर में lower circuit न लग जाता हो। इनके दामों के गिरने का सिलसिला रुक नहीं रहा। फिर एलआईसी को अपने निवेश का पैसा निकालने से कौन रोक रहा है? ये पैसा भारत की जनता का है। एलआईसी के प्रति उसका भरोसा आज का नहीं है, जब राजकुमार प्रबंध निदेशक नहीं होंगे तब से है.

Will LIC keep losing its money?

इन सवालों के बीच उन्हें बार-बार सेवा विस्तार मिलता जाएगा तो सवाल तो उठेंगे ही. जीवन बीमा के प्रबंध निदेशक राजकुमार को एक और सेवा विस्तार दिए जाने की खबरें छपने लगी हैं. हम पहले भी बता चुके हैं इस बारे में कि राज कुमार को दो बार सेवा विस्तार दिया गया है. क्या भारत में कोई दूसरा योग्य व्यक्ति नहीं है इस पद के लिए जो राजकुमार की जगह ले सके. अगर राजकुमार से योग्य कोई नहीं मिल रहा है तो उन्हें आजीवन प्रबंध निदेशक के पद पर क्यों नहीं बिठा दिया जाता।

इसी के साथ bank of बड़ौदा की भी खबर आपको फिर से जान लेनी चाहिए। इनके CEO संजीव चड्ढा ने कहा था कि अपने निवेशक के साथ संकट की स्थिति में बने रहेंगे यानी की वो इतना कुछ होने के बाद भी अडानी को लोन देने के लिए तैयार है. क्या आप जानते हैं कि 19 जनवरी 2023 को इनका कार्यकाल खत्म हो रहा था। 3 साल के लिए नियुक्त किए गए थे। 16 जनवरी को 6 महीने के लिए इनका कार्यकाल फिर से बढ़ा दिया गया। 3 साल तक CEO रहने के बाद और कितना रहेंगे इस पद पर? अगर यही सबसे योग्य व्यक्ति हैं तो इन्हें भी आजीवन सीईओ बना दिया जाना चाहिए। 3 साल क्या छोटा कार्यकाल होता है कि इसके बाद भी सेवा विस्तार दिया जाए। क्या इसी इनाम की वजह से जनाब ने अदानी समूह के साथ बने रहने की बात कही या बाजार की महान समझ के आधार पर ये बात कही।

3 साल तक पद पर रहने के बाद भी सेवा विस्तार देने का क्या मतलब है? भारतीय जीवन बीमा निगम को शेयरधारकों को बताना चाहिए कि अडाणी समूह में अपने निवेश को कहाँ तक डूबने देगा। निगम ने कहा था कि अडाणी समूह में जो निवेश है वो उसकी कुल संपत्ति का एक प्रतिशत है। यह देखने में छोटा लगता है मगर 30 हजार करोड़ इतनी छोटी राशि भी नहीं है कि इसके डूब जाने को लेकर चिंता ना की जाए।

निवेशकों का दिल धड़क रहा होगा इन दिनों जब भी वे एलआईसी के शेयरों के दाम देखते होंगे, मायूस हो जाते होंगे। भारतीय जीवन निगम के शेयरों में भी गिरावट जारी है। 52 हफ्ते में अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। 24 जनवरी को रिपोर्ट आई, तब जीवन बीमा निगम का एक शेयर 702 रुपए का था। सोमवार को इसके एक शेयर का दाम 566 रुपए हो गया। पिछले शुक्रवार को 584 रुपए पर बंद हुआ। एक महीने से कुछ अधिक समय में 17 प्रतिशत से अधिक गिरावट आ गई।

मई 2022 में जीवन बीमा निगम का आईपीओ आया. तब इसके एक शेयर का प्राइस 949 रुपया हो गया था, आज इसके एक share पर 383 रुपए का नुकसान है। मई 2022 के दाम की तुलना में 40 प्रतिशत का घाटा। यह ध्यान रखिएगा कि बाजार में दाम में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। आंकड़े बदल जाते हैं। आज market बंद होते-होते शेयर का rate 575 के आस-पास आ गया।

मीडिया में भारतीय जीवन बीमा निगम के शेयरों में गिरावट और निगम को हुए नुकसान को लेकर हर दिन कुछ ना कुछ छप रहा है? इसमें आमतौर पर आंकड़े होते हैं, इसका जवाब नहीं होता कि जब कोई संस्था अपने fund का निवेश करती है और घाटा होने लगता है, तो उस निवेश से बाहर आने का फैसला कब लिया जाता है, कौन लेता है, कैसे लिया जाता है, इसकी जानकारी नहीं छप रही।

जब Hindonburg की रिपोर्ट आई तब भारतीय जीवन बीमा निगम के प्रमुख का बयान आया कि अदानी समूह में जो निवेश किया गया है, वो अभी फायदे में है, घाटा नहीं हुआ। हमने भी आपको यही बताया मतलब जिस दर पर शेयर खरीदे गए हैं उसके दाम गिरने के बाद भी मुनाफा है। 27 जनवरी को अदानी समूह में एलआईसी के शेयरों का मूल्य 56142 करोड रुपए के बराबर था जो निवेश की लागत से फिर भी बहुत अधिक था. लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है।

24 जनवरी को अदानी समूह के शेयरों में एलआईसी के निवेश का कुल मूल्य 81268 करोड रुपए था। मगर एक के भीतर यानी 24 फरवरी 2023 को 81268 करोड़ से घटकर 27000 के करीब आ गया. इस हिसाब से देखिए तो एलआईसी को अडाणी ग्रुप में निवेश से अब तक 50000 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चूका है। यही नहीं जो मूल पैसा लगाया गया अब तो वह भी घाटे में है। दैनिक भास्कर ने शुक्रवार को अपने एक रिपोर्ट में लिखा है कि एलआईसी ने अदानी समूह की 5 कंपनियों में 32700 करोड रुपए के शेयर खरीदे। जिनका मूल्य इस समय 27000 करोड़ के करीब आ चुका है.

इस बीच एलआईसी को दिसंबर में 50000 करोड़ का मुनाफा मिल रहा था जो अब 3000 करोड़ के घाटे में बदल गया है। Live Mint ने भी लिखा है कि 3000 करोड़ का नुकसान हुआ है। नेगेटिव हो चुका है. business standard के सैमी मोदक ने लिखा है कि market capitalization की रैंकिंग में एलआईसी छठे नंबर पर थी जो अब बारहवें नंबर पर आ गई है.

2022 में जब एलआईसी का आईपीओ आया. तब इसका market capitalization छः लाख करोड़ से अधिक का था। अब दो दशमलव चार लाख करोड़ गिर गया है। चालीस प्रतिशत की गिरावट आ गई है। इस समय एलआईसी में सरकार की छियानवे दशमलव पांच प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए भारतीय जीवन बीमा निगम के market capitalization में कमी होगी, तो उसका असर सरकार के खजाने पर तो पड़ेगा ही, नागरिकों पर भी बुरा असर पड़ेगा।

जिस रफ़्तार से अदानी समूह के share गिरते जा रहे हैं. वैसे में ये सवाल गलत नहीं हो सकता कि एलआईसी को क्यों दांव पर लगाया जा रहा है? अब सवाल है कि तीन हज़ार करोड़ का घाटा किसके हित के लिए उठाया जा रहा है? अदानी के लिए या भारत की जनता के लिए? जिसने एलआईसी के शेयरों में निवेश किया है?

हमारे कुछ सवाल हैं। 31 जनवरी के आसपास जीवन बीमा निगम के प्रबंध निदेशक राजकुमार का बयान आया कि अडाणी के एफपीओ में सौ करोड़ का निवेश बोर्ड की मंजूरी के बाद किया गया, आगे और निवेश नहीं होगा। कुछ दिनों के बाद अडानी ने एफपीओ वापस ले लिया। हमारा सवाल है कि क्या उस बोर्ड ने अदानी के शेयरों में निवेश जारी रखने के फैसले की कोई समीक्षा की है कि तीन हजार का घाटा हो चुका है, एलआईसी और कितना घाटा सहेगी?

क्या पूरा ही पैसा डूबने दिया जाएगा? 31 जनवरी के business standard में राजकुमार ने कहा था कि स्थितियां बदल रही हैं. लेकिन अब तो एक महीना हो गया, स्थितियां बदल कहाँ रही हैं? हर दिन अदानी के share तो गिरते ही जा रहे हैं। एलआईसी ने तब कहा कि अदानी समूह से सवाल करेंगे तो क्या जवाब मिला इसका भी कोई ब्यौरा जनता को नहीं दिया जा रहा है या दिया गया है, आप पता कर लीजिए। पैसा आपका डूब रहा है और सेवा विस्तार किसी और को मिल रहा है।

भारत की जनता भारतीय जीवन बीमा निगम पर भरोसा करती है। नॉर्वे का सरकारी पेंशन फंड दुनिया सबसे बड़ा पेंशन फंड माना जाता है। इसने अदानी समूह से अपना सारा पैसा निकाल लिया। ऑस्ट्रेलिया में पूछा जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों के पेंशन फंड का कुछ हिस्सा अदानी समूह में लगा है, कहीं डूब तो नहीं जाएगा? और हम किस आधार पर मानकर चल रहे हैं कि जीवन बीमा के निवेशक चिंतित ही ना हो?

नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया के निवेशक चिंतित हैं। मगर भारतीय जीवन बीमा के आम निवेशक अपने शेयरों के दाम गिरने से होली मना रहे हैं। अब तक माना जा रहा था कि अदानी समूह से आ रही घाटे की खबरें उसी तक सीमित हैं और निचले स्तर तक इनका प्रभाव नहीं पहुंच रहा। business standard में Sachin Patta की खबर छपी है कि अदानी समूह से पैसा निकालकर नॉर्वे के pension fund ने अंबानी समूह में डालना शुरू किया। फंड के कागजों के एक अध्ययन के मुताबिक नॉर्वे के फंड ने 2022 में अंबानी की कंपनियों में 180 मिलियन डॉलर से भी अधिक का निवेश किया। ये जानकारी दिसंबर 2000 तक की है। खबर के मुताबिक ये निवेश रिलायंस की कम से कम चार कंपनियों में किया गया।

वहीं नॉर्वे फंड ने दिसंबर 2022 तक अदानी समूह की तीन कंपनियों में करीब 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ था। जिसे पूरी तरह निकाल लिया गया है। जहाँ तक हमने इस खबर को समझा है और समझने में अगर चूक नहीं हुई है, तो इस खबर में ये भी लिखा है कि नॉर्वे के फंड ने सरकारी प्रतिभूतियों में भी अपना निवेश कम किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से भी पैसा निकाला गया है। रिपोर्ट में लिखा है कि Reliance के bond सरकार संबंधी bond की श्रेणी में आते हैं।

business standard को pension fund ने बताया कि पैसा निकालने की वजह bond को सरकार द्वारा guarantee दिया जाना है। नॉर्वे के fund ने Hindonburg की रिपोर्ट से पहले ही अपना निवेश निकाल लिया। इसमें कहा गया कि pension fund को शक हो गया कि कहीं उनके पैसे का इस्तेमाल करके प्रदूषण फैलाने वाले कार्य ना किए जा रहे हो. क्योंकि दस फरवरी की filing से पता चला कि अदानी enterprises अडाणी ग्रुप की green कंपनियों के stock को गिरवी रखकर ऑस्ट्रेलिया की कारमाइकल कोयला खदानों को finance कर रहा है। pension fund ने कोयले को अपने portfolio से black list कर दिया है। इसलिए किसी भी रूप में कर्माइकल प्रोजेक्ट तक उनका पैसा पहुंचना उनके नियमों का उल्लंघन है। ये बात उनकी एक प्रमुख अधिकारी किरण अजीज ने एक साक्षात्कार में कही थी.

अदानी समूह पर स्टॉक में हेराफेरी के आरोप लगे हैं। के उसके जरिए दामों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया वो किस तरह से हुआ उसमें कौन शामिल है यही तो जानने की बात है। शेल कंपनियां बनाकर अपना ही पैसा इधर से उधर घुमाने के आरोप लगे हैं। अदानी ग्रुप ने खंडन तो कर दिया मगर अभी तक वो सवाल सामने है, विपक्ष के हर दल ने इतने सवाल उठाए, धरना प्रदर्शन किया मगर जाँच की बात टस से मस आगे नहीं बढ़ी।

अब हम यहाँ पर दो ख़बरों का जिक्र करना चाहेंगे। इस खबर को ध्यान से देखिए, लिखा है कि वित्तीय मामलों के जानकारों ने national stock exchange board और सेबी से कहा है कि अदानी समूह की पाँच कंपनियों के शेयरों को निफ्टी fifty से जोड़ा गया है। इस फैसले की समीक्षा कीजिए। इससे लाखों निवेशकों की बचत इकत्तीस मार्च से इस डूबते जहाज में खपने लग जाएगी। सत्रह फरवरी को निफ्टी बताया कि इसकी एक कमेटी ने तय किया है कि तमाम में स्टॉक में अदल-बदल की जा रही है। यह एक नियमित प्रक्रिया है।

अदानी विलमर को निफ्टी नेक्स फिफ्टी और निफ्टी हंड्रेड में शामिल किया गया है। अडाणी टोटल गैस को निफ्टी शरिया पच्चीस में जोड़ा गया है और अडाणी पावर को निफ्टी के दस अलग-अलग सूचकांकों में रखा गया है। निफ्टी-फिफ्टी में अदानी इंटरप्राइजेज पहले से हैं। नई सूची के बाद निफ़्टी hundred में अदानी समूह के छह और stock जुड़ जाते हैं, हिंदू की एक रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के mutual fund के इकतालीस लाख करोड़ का सोलह प्रतिशत पैसा इन सूचकांकों में लगा है, निफ़्टी के जैसे ही निफ़्टी-फिफ्टी या निफ़्टी hundred में निवेश करेंगे उसका कुछ हिस्सा अदानी समूह के इन शेयरों में जाएगा और डूब सकता है.

अभी तक ये सवाल उठता रहा है कि mutual fund तो अदानी समूह में निवेश नहीं किया। Hindonburg की रिपोर्ट के बाद share बाजार में इनके दाम गिरते ही जा रहे हैं। तो क्या पिछले दरवाजे से mutual fund का पैसा इन शेयरों में लगवाया जा रहा है? लेकिन आप इस खबर को Hindonburg की report के बाद आई एक दूसरी खबर से मिलाकर देखिए।

अमेरिकी share बाजार Dow Jones ने अदानी ग्रुप को sustainable index से हटा दिया। इससे अब कोई इस market में index के जरिए के शेयर नहीं खरीद सकेगा। अडाणी के शेयरों की मांग खत्म हो जाएगी। निवेशकों की सुविधा के लिए शेयर बाजार में अलग-अलग सेक्टर के लिए इंडेक्स होते हैं। energy के index में energy की कंपनियां डाली जाती हैं। कोई mutual fund जब energy index में पैसा लगाता है, तो उसमें शामिल सारी कंपनियों के share खरीद लेता है।

Dow Jones ने इस सूची से अदानी enterprises को हटा दिया है। इसलिए अब कोई Dow Jones के sustainable index में पैसा लगाएगा तो अडाणी के शेयर नहीं खरीद पाएगा। Dow Jones अपने सूचकांकों से अडाणी समूह के stock को बाहर कर रहा है। यहाँ निफ्टी अपने stock के सूचकांकों में शामिल कर रहा है। क्या इस तरह से अदानी समूह को मदद पहुंचाई जा रही है या फिर ये बाजार की कोई सामान्य प्रक्रिया है। अगर इतनी ही सामान्य होती तो क्या हिंदू अखबार इसे पहली खबर के रूप में लगाता।

इन्हीं सबसे संदेह होता है। जांच की मांग हुई है, कुछ पता नहीं चल रहा। जांच एजेंसियों की डायरी में जैसे अदानी समूह की कंपनियों का पता ही नहीं है। कांग्रेस सत्रह दिनों से अदानी को लेकर सवाल जारी कर रही है। लिखित सवाल होते हैं, कायदे से सरकार की कोई भी एजेंसी लिखकर ही जवाब दे सकती थी, मगर ना तो इन सवालों की reporting होती है, ना ही जवाब आता है।

कांग्रेस ने पूछा है, कि जब MSCI SNP, Dow Zones और FTSE, Russell जैसी प्रमुख market index बनाने वाली कंपनियां अदानी समूह फर्मों के भारांक weightage की समीक्षा कर रही है. National Stock Exchange एनएससी निवेशकों की सुरक्षा के लिए कोई गंभीर कार्रवाई करने में विफल रहा है। इसके विपरीत एनएससी ने 17 फरवरी 2023 को घोषणा कर दी कि वर्तमान में share बाजारों में डूब रही अदानी समूह की कंपनियों में से अतिरिक्त पाँच को चौदह सूचिकांकों में शामिल किया जाएगा। क्या आप अपने करीबी दोस्त को इस संकट से उभारने के लिए एनएससी पर दबाव बना रहे हैं? को ये सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही कि लाखों निवेशकों का एक डूबते हुए व्यावसायिक समूह में निवेश कराकर उनसे धोखाधड़ी ना हो ये कांग्रेस के आरोप हैं।

इंतजार हो रहा है कि अदानी की खबर से जनता की दिलचस्पी कम हो जाए। लगता है कि event की खोज हो रही होगी, ताकि लगातार coverage से चर्चाओं की दिशा मोड़ दी जाए। न्यूज़ की दुनिया चाहे जैसे भी manage हो जाए। मगर share बाजार manage होता नहीं दिख रहा। share बाजार इन खबरों से bore नहीं हुआ है, जहाँ लोग अपने दिमाग का इस्तेमाल कर पैसे लगा रहे हैं। उस share बाजार में अडाणी अपने शेयरों को अभी तक संभाल नहीं सके हैं। इतनी गिरावट के बाद कोई तो दौड़ा आता कि सही मौका है खरीदने का खरीदता और दाम चढ़ते। ऐसा होता तो दिख नहीं रहा।

भारतीय जीवन बीमा के निवेशक जानना चाहते होंगे कि उनका पैसा कब तक सुरक्षित है? अदानी समूह में एलआईसी का पैसा में डूबेगा। तो जिन्होंने एलआईसी के share लिए हैं उनका भी डूबेगा। इस पूरे मामले को आप IDBI के हवाले से समझिए। June दो हजार अठारह की खबर है कि उस समय का IDBI में एलआईसी की ग्यारह प्रतिशत हिस्सेदारी थी लेकिन दो हजार बाईस अक्टूबर आते-आते IDBI में एलआईसी और सरकार की हिस्सेदारी चौरानवे प्रतिशत हो गई। इसमें एलआईसी का हिस्सा करीब उनचास दशमलव दो प्रतिशत हो गया।

जून 2018 में wire की रिपोर्ट में लिखा है कि आईडीबीआई एलआईसी बीस हजार करोड़ रुपए लगाने वाली है, जो नाली में पैसा बहाने के जैसा है। क्योंकि उस समय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे बुरा हाल आईडीबीआई का ही था। उसका एनपीए बहुत ज्यादा था। चार साल बाद यानी अक्टूबर बाईस के की खबरों में ये लिखा जाता है, कि सरकार और एलआईसी मिलकर अपनी साठ दशमलव सात, दो प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। इस साल ग्यारह जनवरी को सोनिया श्रीनोय और प्रशांत नायर की एक रिपोर्ट छपी।

एलआईसी का बयान है कि वो आईडीबीआई बैंक से बाहर नहीं निकलेगी, मगर अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहती है। ये बयान प्रबंध निदेशक राजकुमार के हैं। इनके बयान से ठीक दो दिन पहले department of investment and public asset management डीआईपीएम के सचिव बयान देते हैं कि आईडीबीआई से सरकार और एलआईसी दोनों बाहर निकल जाएँगी। सचिव के बयान की कीमत देखिए, दो दिन बाद एलआईसी के प्रबंध निदेशक कहते हैं पूरी तरह बाहर नहीं निकलेंगे, हिस्सेदारी भले घटा सकते हैं।

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इन खबरों को बताने का मकसद है कि क्या एलआईसी अदानी समूह से अपना पैसा निकालने पर विचार कर रही है? करेगी या उसके साथ ही डूबते रहने का इरादा है। यूपी की लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को गाना गाने पर पुलिस नोटिस भेज देती है। यहाँ तो शेयरों के दाम बढ़ा-चढ़ाकर manipulation करने के आरोप लगे? बारह लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति हवा हो गई। मगर ईडी, सीबीआई का कोई छापा नहीं पड़ा। आरोपियों के पक्ष में महापंचायतें तक हो जाती है इस देश में, पुलिस को ललकारा जाता है, कुछ नहीं होता। एक धर्म के खिलाफ हिंसक नारे लगाए जाते हैं, कुछ नहीं होता।

नेहा सिंह राठौर के गानों से ही तनाव फैल रहा है। नेहा सिंह राठौर अगर अदानी समूह और हिंडन वर्ग की रिपोर्ट को मिलाकर कोई गाना ही बना दें, गा दें, तो notice किसे जाएगा? नेहा को या hindan वर्ग को या अदानी समूह को कम से कम इसी तरह के फालतू सवाल ही पूछ लीजिए, सवाल के नाम पर अगर गंभीर सवालों के जवाब नहीं आते हैं तो दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत पर chief justice के सामने सुनवाई हुई।

ये सवाल उठ रहा था कि सिसोदिया के घर और अन्य जगहों पर सीबीआई पिछले साल से छापे मार रही है, पूछताछ कर रही है। सिसोदिया सीबीआई के दफ्तर भी जा रहे हैं, फिर भी उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया? क्या जेल में रखने के लिए? सिसोदिया के अब विरोधी प्रशांत भूषण ने भी ट्वीट किया है कि जो आरोप लगे हैं उनकी प्रकृति गंभीर है और जाँच गंभीरता से होनी चाहिए लेकिन गिरफ्तारी की बात समझ में नहीं आती है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस स्तर पर दखल नहीं देंगे हाई कोर्ट जाइए। आमतौर पर जब भी हाई कोर्ट का विकल्प रहता है कोर्ट की तरफ से यही कहा जाता है

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