The Mukaab: सऊदी की फ्यूचर सिटी को लेकर क्यों भड़क रहे मुसलमान?, The Mukaab vs Kaaba, Controversies related to New Kaaba

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The Mukaab: सऊदी अरब में पिछले कुछ दशकों से बहुत सारे विकास के काम किये जा रहे हैं. इसी सिलसिले में इनके कैपिटल सिटी रियाध में एक नया और बहुत बड़ा बिल्डिंग निर्माण का काम किया जा रहा है. जिसका नाम रखा गया है The Muqab इस समय सऊदी अरब के इस फ्यूचर प्लानिंग का मुसलमानों द्वारा विरोध किया जा रहा है.

इसके पीछे क्या है रिलीजियस सेंटीमेंट्स है उसको जानेंगे और जानेंगे इस जुड़े वातावरण के नुकसान के बारे में भी. इसके अलावा इस पर भी एक नजर डालेंगे कि पिछले कुछ दशकों में आखिर क्यों अरब और खाड़ी देशों में युद्धस्तर पर डेवलपमेंट के काम किये जा रहे हैं.

The Mukaab: सऊदी की फ्यूचर सिटी को लेकर क्यों भड़क रहे मुसलमान?

असल मायने में दुनिया में इस समय जो सबसे बड़ी बहस छेड़ रही है वो ये है कि आने वाले समय में हर देश fossil fuel का substitute तलाश रहा है। फिलहाल इंडिया के अंदर जो टॉप five sources of energy है, उनमें 50% के लगभग coal से बनने वाली energy है. लेकिन उसके अलावा जो energy के sources हैं.

उनमें wind energy लगभगग 10%, solar energy लगभग 15 percent है. ये अपने आप में एक बहुत significant नंबर है. भारत hydro fuel से बनने वाली energy भी लगभग 10-12% percent है. कहने का अर्थ ये है कि हमारा fossils fuel पर dependence धीरे-धीरे कम हो रहा है.

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अब आप में से कुछ लोग ये कह सकते हैं कि fossil fuel का electricity से क्या connection है. connection बहुत बड़ा है क्योंकि आज भी जितना ज्यादा हम लोग तेल बाहरी देशों से इम्पोर्ट करते हैं, उस तेल का import gulf countries से लगभग 80 percent के आसपास है. ऐसी स्थिति में भारत में जितना भी परिवहन के लिए जो fuel use किया जा रहा है वो fossil fuel है यानी कि petrol, diesel जैसी चीजें हैं.

आने वाले समय में भारत जैसे दूसरे तमाम देशों ने ये decision लिया है कि वो साल 2030 तक 30 प्रतिशत गाड़ियां इलेक्ट्रिसिटी से ही चलेंगे। इससे 30 percent हमारा fuel consumption कम हो जाएगा।

आज की तुलना में बात करें तो इसी progress को सऊदी अरब भी तो समझता होगा ना कि इन लोगों ने हमारा option तलाशना शुरू कर दिया है और देखिए दुनिया के बड़े-बड़े देशों ने अपने लिए target ले लिए हैं कि हम fossil fuel की जगह electricity use करेंगे।

electricity बनेंगे कैसे तो इसके लिए बोले कि कोयले वाली electricity नहीं, solar energy वाली, wind energy वाली, hydropower वाली और nuclear energy से इलेक्ट्रिसिटी बनाये जाएंगे। फिलहाल India खुद 50% बिजली non fossil fuel से तैयार कर रहा है. अब जब हम इतना बड़ा मात्रा में लगभग 50% के आसपास बिजली का उत्पादन कर रहे है बिना petrol और diesel के और बिना प्रदूषण फैलाए। इस पूरे दशक में जब 30 percent vehicle, इलेक्ट्रिक के हो जाएंगे तो अगला जो दशक होगा उसमें तो non fossil fuel से जो बिजली बनाने का प्रतिशत है वो 70% तक पहुँच जाएगा।

आज से 25 साल बाद इंडिया में जहाँ हर तरफ आपको electric vehicle majority में दिखने लगेंगे। सोचिए उस समय सऊदी के हालात क्या होंगे? Gulf countries किसको तेल बेचती हैं? या तो चीन को बेचती हैं या फिर इंडिया को बेचती हैं? सबसे ज्यादा population भी हैं ना हमारे पास. अब ये दोनों ही देश electricity पर निकल लिए। इसका मतलब आप जब प्लान कर सकते हो कुछ बड़ा कि हम इस तरह का substitute कर देंगे तो इन्हें भी तो अपना भविष्य तलाशना हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सऊदी ने Vision 2030 जारी किया था।

इंडिया ने जब कहा कि 30 परसेंट व्हीकल हमारे electricity से चलेंगे। तो सऊदी ने भी कहा कोई बात नहीं हम अपने यहाँ कुछ और बना लेंगे। हम अपने देश को उस पैसे से जो फिलहाल तेल बेच के हमें मिल रहा है हम अपने आपको एक developed country बना लेंगे।

जैसे उदाहरण के लिए आज आप जब चर्चा करते है Singapore की. Singapore कुछ भी नहीं बेचता है. बहुत छोटा सा देश है. कुछ भी नहीं बेचता है से मतलब क्या है, खूब सारा export आता है वहाँ से. दुनिया भर के देशों ने अपने offices खोल लिए है सिंगापुर के अंदर। पोर्ट ऑफ़ कॉल facility है और उसके नाम पर वहां पर development इतना उच्च स्तर का है कि हर देश का कोई ना कोई कंपनी वहां पर बना हुआ है। एक प्रकार से उन्होंने सारी facility उपलब्ध करा दी है।

अब जैसे कि हांगकांग की आप बात करेंगे तो हांगकांग में भी लगभग ऐसी ही चीज है. जहां पर तरक्की के नाम पर खुद की कोई पैदावार नहीं, तेल नहीं है और ना ही कोई बहुत बड़े खजाने मिल गए हैं. लेकिन अपने आप को ऐसा विकसित कर लिया है कि वो दुनिया भर के लिए एक काम करने की जगह बन गया है। इसलिए दुनिया भर की कंपनी ने वहां आकर अपने ऑफिस खोल रखा है.

इसी तर्ज पर यूएई ने अपने यहाँ दुबई को develop किया। आज दुबई से लोग तेल खरीदने नहीं जाते हैं. दुबई में ऑफिसेस हैं इंडिया के और दूसरे देशों के बड़ी-बड़ी कंपनियों के. progress का आजकल route बदल गया है. इंडिया के जो छोटे-मोटे startups हैं या बड़ी companies हैं वो जब अपने लोकल शहर में grow कर लेती हैं तो वहाँ से एक कदम उठकर के बैंगलोर पहुँच जाती हैं कि अब हमारा ऑफिस बैंगलोर होगा।

बैंगलोर में जब छोटा-मोटा grow कर लेते हैं तो एक स्टेप आगे बोले अब अपना अगला ऑफिस दुबई में होगा। फिर थोड़ा बहुत और आगे बढ़ जाते हैं तो बोले अमेरिका चलेंगे। तो एक प्रकार का halting place बन चूका है दुबई इन कम्पनीज के लिए।

सऊदी ने भी इसी प्रकार से एक lesson सीखा कि क्यों ना हम भी दुनिया को अपने यहाँ आकर्षित करें। आकर्षित करने के लिए क्या किया जाए, development को prefer किया जाए. आपके दिमाग में सवाल आएगा कि तेल का substitute थोड़ी बन जाएगा। अरे क्यों नहीं बन जाएगा भाई. जब बड़ी-बड़ी companies आपके यहाँ पर काम करेंगी तो वो जो पैसा earn करेंगी। उसमें से tax आपको देंगी उससे आपकी कमाई होगी।

कुछ दिनों पहले जो क़तर में FIFA World Cup हुआ था. क़तर ने इतना investment क्यों किया? उन्हें पता चल गया कि तेल की चीजें आगे तक नहीं चलने वाली हैं. development इतना कर दो, promotion इतना कर दो कि आने वाले समय में लोगों को आप work destination लगने लगे. आज UK, पुराना UK नहीं है, ब्रिटेन जो है वो पुराना वाला ब्रिटेन नही है. ब्रिटेन पहले क्या था? दुनिया भर के अंदर औद्योगिक काल के अंदर सामान निर्माण करके भेजने वाला देश था।

इंडिया में हम क्या कहते थे? कच्चा माल ब्रिटेन जाता। बना बनाया माल आता था. industries थी. Manchester जैसी जगह थी. आज क्या है? बेरोजगारी है? लेकिन उस पैसे से उन्होंने वो development कर लिया कि quality of लाइफ के लिए लोग आज खुद से migrate करने के बाद वहां पहुँच रहे हैं. वहाँ के अच्छे colleges में पढ़ने जा रहे हैं, वहाँ घूमने जा रहे हैं, वहाँ रहने जा रहे हैं. उनकी economy अपने आप चलने लग गई.

यूरोप के अधिकांश देश जो पहले कभी उपनिवेश बना के घूमते थे, पैसे लूटते थे वो आज क्या बन चुके हैं. आज दुनिया के लिए एक घूमने की जगह बन चुके हैं। लोग बढ़िया मात्रा में पैसे खर्च करते हैं. उनकी गजब की economy चल रही है बिना कुछ किए काम चल रहा है।

इस vision को सऊदी भी समझ रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए 2030 का vision दिया था और उस vision में इन्होंने इस प्रकार की planning की थी कि हम आने वाले समय में कुछ ऐसी चीजें बना लेंगे जो कि फ्यूचर के हिसाब से होगा.

अपने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलप करेंगे, ज्यादा फायदा दे देंगे लोगों को रहने के लिए, ग्रीन कार्ड दे देंगे, power और water supply दे देंगे, military spending को आत्मनिर्भरता की तरफ ले आएंगे, corruption free कर देंगे, unemployment घटा देंगे, आदि. ऐसी चीजों को ध्यान में रखते हुए उसने भविष्य के लिए 2030 के दशक को ध्यान में रखते हुए Riyadh के अंदर इस The Muqab नाम की building का निर्माण शुरू किया है.

तो ये कैसी building बनाने वाले हैं? इन्होंने जो इस बिल्डिंग की तुलना की है वो New York के एम्पायर एस्टेट बिल्डिंग से की है। इनका मानना है कि जो न्यूयॉर्क के अंदर empire estate नाम की जो building है उससे बीस गुना ज्यादा space के साथ हम The Muqab बनाएंगे। अमेरिका के इस बिल्डिंग को दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक माना जाता है।

चार सौ मीटर चौड़ा, चार सौ मीटर ऊंचा, चार सौ मीटर लंबा होगा। इसके अंदर हर तरह की facility मौजूद रहेगी. चार लाख मीटर square के अंदर hospitality रिटेल स्पेस साथ-साथ जो lesser के iconic landmark इसके अंदर बनेंगे। वो अपने आप में ऐसे होंगे कि उसकी कल्पना केवल imagination में कर सकते है।

पांच करोड़ वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का floor space बनेगा क्योंकि यह बहुत ऊँची building बनेगी। एक लाख आवासीय इकाइयां होंगी। नौ हजार स्क्वायर मीटर से ज्यादा के area के अंदर होटल के कमरे बनेंगे। नौ दशमलव आठ लाख square मीटर का रिटेल space बनेगी जहाँ दुकानें होंगी।

चौदह लाख square मीटर का ऑफिस space जहाँ पर लोग ऑफिस खोल सकेंगे। छह दशमलव दो लाख square किलोमीटर का lease space इसके अंदर develop किया जाएगा और जिस को बनाया जाएगा। वहां से एयरपोर्ट मात्र बीस मिनट में पहुंचा जा सकेगा। 2030 तक इसको कम्पलीट करने का विज़न है.

सवाल है कि इसके निर्माण के लिए पैसा कहाँ से आएगा। तो इसके लिए इन्होंने public investment fund बना रखी है. जैसे Indian गवर्नमेंट के द्वारा investment अपने केंद्र के बजट से किया जाता है. ऐसे ही इन्होंने अपने ही द्वारा एक सरकारी नियामक संस्था बना रखी है जो funding करेगी।

अब यहाँ पर सवाल है इन बड़े प्रोजेक्ट्स से भारत को क्या फायदा मिलेगा। भारत से बड़ी संख्या में कामगार जो है दुनिया को देता है एक दिमाग देता है जो कि चला जाता है America और यूरोप के देशों में. जहाँ पर हमारे यहाँ से पढ़े लिखे बढ़िया IITian बच्चे बच्चियाँ जो है वो नौकरी की लालच में बाहर चले जाते है.

आजकल लोग Dubai, Singapore यहाँ पर भी जा रहे है और जाकर नौकरी कर रहे है. अच्छा इसी प्रकार से इस जगह पर एक तो रोजगार का अवसर सीधा जब वो कंपनियां बनेगी तब मिलेगा। लेकिन उसके अलावा भी बड़ी मात्रा में देश के जो कामगार है कामगार मतलब labours जो है हमारे देश से वो gulf में already काम करने के लिए बड़ी मात्रा में जाते है.

आपको मालूम होना चाहिए जब क़तर में अभी फीफा वर्ल्ड कप हुआ था तो उस समय पर भी बड़ी संख्या में देश से निकल कर के लोग कतर गए थे। ऐसी कल्पना की जा रही है कि 2030 में अगर ये काम complete होना है तो अभी से लेकर के सऊदी जाने वालों की संख्या में लगभग तीन-चार लाख लोगों की संख्या में इजाफा हो जाएगा।

क्यों? क्योंकि असल में इस काम को करने के लिए बड़ी मात्रा में फिर से labour की जरूरत पड़ेगी। तो हमारे यहाँ से बहुत सारे लोग labour का काम करने के लिए कोई electrician का काम करने के लिए, कोई plumber का काम करने के लिए, कोई चेन्नई का काम करने के लिए है ना सामान उठाने का काम करने के लिए, supply का काम करने के लिए, इनके लिए जाते हैं.

आज अगर आप पूरा का पूरा यूएई उठा के देख लें। वहाँ आबादी लगभग एक करोड़ है, वहाँ पर लगभग 40 लाख Indians हैं. ऐसे ही हालात सऊदी के हैं. वहां पर बड़ी मात्रा में Indians काम करने के लिए जाते हैं. इसके अलावा आपके दिमाग में एक प्रश्न और आएगा और वो ये है कि ये केवल कल्पना है real में वाकई में कुछ ऐसा हो रहा है.

इससे पहले जो इन्होंने नियोम नाम की city announce की थी उसका twenty percent काम already पूरा भी हो चूका है। यानी इनके यहाँ पर जो projections आते हैं ये पेपर पर नहीं execution level पर भी आते हैं. न्योम के अंदर लगभग साढ़े चार लाख घर बनेंगे। यानी यहाँ पर भी बड़ी मात्रा में construction वर्क चल रहे हैं.

अच्छा, तो अब सवाल आता है, कि क्यूब को लेकर controversy क्यों हो रही है? मुस्लिम वर्ल्ड क्यों परेशान हो रहा है? इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण क्या है? इस बिल्डिंग का क्यूबिकल शेप में होना, काबा जैसी आकृति का होना। काबा जो कि cubical shape है, मुकाब भी cubical shape का है। इस वजह से यहाँ पर मुस्लिम लोगों ने काफी ज्यादा tweets करके इसके खिलाफ अपनी गुस्सा जाहिर किया है। हालांकि बहुत से लोगों में उत्साह भी है, इस बात का कि development होंगे और रोजगार मिलेंगे। लेकिन उस वजह से धार्मिक sentiments जो हैं, कुछ लोगों के यहाँ पर प्रभावित हुए हैं.

अब जब यहाँ पर धार्मिक sentiments प्रभावित हुए हैं। तो मक्का मदीना जो कि सऊदी अरबिया में है उसका काबा connection क्या है? देखिए ये जो जगह आपको दिखाई दे रही है यहाँ पर ये जो आपको premises दिख रहा है ना बीच में cubical shape का यही असल में काबा है और काबा चौदह सौ साल पुरानी cubical building है जो कि मक्का में स्थित है. ये जो आपको जगह दिख रही है ये मक्का है और यहाँ पर ये जो लोग आपको दिख रहे है. असल में वो इसी काबा के चारों तरफ चक्कर लगा रहे हैं. इसी काबा बिल्डिंग के से इसका resemblance cubical होने के कारण इसका विरोध हो रहा है।

एक और खास बात ये जो काबा building है, जिसकी परिक्रमा यहाँ पर लगाने की बात हम कर रहे हैं, ये अपने आप में कुछ धार्मिक मान्यताएं रखती है, और वो मान्यता ये है कि जितनी भी दुनिया के मुस्लिम्स हैं, वो इसी की तरफ देख करके नमाज़ अदा करते हैं। नमाज़ अदा करने में काबा की तरफ देख करके नमाज़ अदा करने की जानकारी है. काबा तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध मस्जिद अल हर हरम के अंदर स्थित है. जहाँ पर लाखों की संख्या में लोग हर साल आते हैं। हज के दौरान लोग इसी काबा ईमारत के चक्कर लगाते हैं.

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कहा जाता है कि जो ये काबा है अल्लाह के लिए बनाया गया पहला प्रार्थना ग्रह है। जिससे इब्राहिम और उनके इस्माइल ने अल्लाह के कहने पर मक्का नामक जगह पर निर्मित किया था. ये चालीस फीट लंबा है, तैसीस फीट चौड़ा ग्रेफाइड पत्थर है, काले पत्थर और सोने से बना हुआ है. आने-जाने के लिए केवल एक दरवाजा है, इसमें कोई खिड़की नहीं है।

काबा के अंदर पूर्वी कोने में जमीन से लगभग पांच फीट की ऊंचाई पर एक पवित्र काला पत्थर लगा हुआ है। हज के लिए जाने वाले सभी तीर्थ यात्री नाम की रस्म के अनुसार काबा की सात परिक्रमाएं करने के बाद इस काले पत्थर को चूमते हैं. कहा जाता है कि काबा वह स्थान है जहाँ से पृथ्वी की शुरुआत हुई थी.

हज क्या होता है? तो इस्लाम के अंदर पाँच फर्ज बताए गए हैं उनमें से एक फर्ज हज है बाकी जो चार फर्ज है उसमें कलमा है, रोजा है, नमाज है और जकात है. जो असल यहाँ पर मुद्दा था वो काबा से resemblance का मुद्दा था. इसलिए मुस्लिम समुदाय इसका विरोध कर रहे थे.

अब हम बात करते हैं environment के बारे में जिसके बारे में बार-बार ये कहा जा रहा है कि ये building environment friendly है। environment friendly कैसे? यहाँ पर किसी भी प्रकार से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाया गया है।

क्योंकि आप कह रहे हैं कि आपने building वहां बनाई जहाँ तो desert था। अब तो आप पौधे लगाएंगे और इसके साथ-साथ आप energy भी conserve करेंगे, बिल्कुल सही है। sometimes ये कहा जाता है कि जब भी निर्माण कार्य होगा तो कहीं से पत्थर आएगा, कहीं से रोड़ा आएगा, कहीं से बजरी आएगा तो निश्चित ही पर्यावरण का नुकसान तो हुआ होगा।

लेकिन ऐसी buildings को आजकल बनाने में जिन तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है जैसे बिजली जो कि बहुत ज्यादा pollution का बड़ा कारण है उसको replace करने के लिए solar energy का use किया जाता है. वहीं दूसरी ओर पानी उसे recycle करके use किया जाता है.

जहाँ समुद्र से पानी filter हो के आएगा के बाद बचा हुआ पानी फिर से filter हो जाएगा। यानी एक प्रकार से पानी बिजली जैसी जो बुनियादी आवश्यकताएँ है उन आवश्यकताओं की पूर्ति यहाँ पर recycle तरीके से की जाती है. ये माना जाता है कि pollution free अगर किसी जगह को रखना है तो उस जगह पर कम से traffic हो, minimum distances हो, ventilation proper हो.

इसी को आजकल environment friendly building का concept कहा जा रहा है. अब ये डिबेट है तो इसलिए development और environment की बातें कभी भी एक साथ चल नहीं पाती है और उनका विरोध होता है.

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